William Shakespeare (विलियम शेक्सपियर)

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विलियम शेक्सपियर का जन 26 अप्रैल सन 1564 को इंग्लैंड के एवन शहर में हुआ था| वैसे तो इनकी जन्म की तिथि कंफर्म नहीं है लेकिन कई सारे चर्चित रिकॉर्ड में उनका जन्म 26 अप्रैल को दर्शाया गया है विलियम शेक्सपियर के पिताजी का नाम जॉन शेक्सपियर है जो कि एक सफल व्यापारी थे साथ ही सरकारी नौकरी में एक अच्छे पद पर भी थे| एवं 1569 को उन्हें मेयर के रूप मेरी चुना गया तथा माताजी marri शेक्सपियर था जो कि पड़ोस के गांव की एक धनी जमीदार की पुत्री थी विलियम शेक्सपियर अपने 8 भाई बहनों में से एक थे जिनमें विलियम तीसरे नंबर के पुत्र थे हालांकि विलियम शेक्सपियर की स्कूली वर्षों के दस्तावेज जीवित नहीं है लेकिन शायद इन्होंने लैटिन ग्रामर एवं साहित्य का अध्ययन किया था और उन्होंने अपने घर की स्थिति और पिताजी का सहायता के लिए अपने पढ़ाई को 13 साल की उम्र में ही छोड़ दिया था| और इसी तरह इनका शुरुआती जीवन व्यतीत हुआ स्कूल कि पढ़ाई पूरी करने के बाद शेक्सपीयर ने 1582 में ऐनी हैथवे से शादी कर ली। जब उन्होंने शादी की उस समय वे 18 साल और ऐनी हैथवे 26 साल की थी! ऐनी हैथवे (Anne Hathaway) का जन्म स्ट्रैटफोर्ड के ही एक गाँव Shottery में हुआ था|

और वे वही पर पली-बढ़ी थी। विवाह के बाद उन्होंने अपना बाकी का जीवन स्टैटफोर्ड में ही बिताया। आगे के वर्षों में ऐनी और उनके बच्चें उनके साथ स्ट्रैटफोर्ड में ही रहने लगे, जबकि शेक्सपीयर लंदन में काम करने लगे।हालांकि हम यह नहीं जानते कि शेक्सपीयर कब लंदन आए और कब वही स्थायी रूप से काम करने लगे। उनके एक छोटे बेटे हैमलेट की मृत्यु 11 वर्ष की छोटी आयु में 1596 में ही हो गई। उनकी सबसे बड़ी बेटी Susannah का विवाह स्टैटफोर्ड के एक मशहुर डॉक्टर जॉन हॉल से हुआ। Susanna के सबसे पहले बच्चे एलिजाबेथ, जो कि एक लड़की थी का जन्म वर्ष 1608 में हुआ। उनकी दूसरी बेटी जूडिथ का विवाह भी वर्ष 1616 में, शेक्सपीयर के मृत्यु के पहले ही वही के एक Vintner थॉमस किनी से हो गई।शेक्सपीयर ने बहोत सा काम 1589 से 1613 के समय में ही किया है।उनके प्रारंभिक लेख और नाटक साधारणतः कॉमेडी होते थे। बाद में 1608 तक उन्होंने दुखांत नाटक लिखे, जिनमे हैमलेट, ऑथेलो, किंग लेअर और मैकबेथ भी शामिल है। अपने अंतिम समय में उन्होंने दुःख सुखान्तक नाटको का लेखन किया था।

जिनमे कुछ रोमांचक नाटक भी शामिल है। उनके बहोत से नाटको को प्रकाशित भी किया गया है। 1623 में शेक्सपीयर के दो दोस्त और अनुयायी अभिनेता जॉन हेमिंगस और हेनरी कंडेल ने मिलकर उनके मरणोपरांत फर्स्ट फोलियो को प्रकाशित किया। 20 से 21 वी शताब्दी में मॉडर्न कवियों ने उनके कार्यो को दोबारा खोज निकाला और रूपांतर कर उसे प्रकाशित करने अंतिम नाटकों में शेक्सपियर का परिपक्व जीवनदर्शन मिलता है। महाकवि को अपने जीवन में विभिन्न प्रकार के अनुभव हुए थे जिनकी झलक उनकी कृतियों में दिखाई पड़ती है। प्रणय विषयक सुखांत नाटकों में कल्पनाविलास है और कवि का मन ऐश्वर्य और यौवन की विलासितामें रमा है। दु:खांत नाटकों में ऐसे दु:खद अनुभवों को अभिव्यक्ति है जो जीवन को विषाक्त बना देते हैं।शेक्सपियर के कृतित्व की परिणति ऐसे नाटकों की रचना में हुई जिनमें उनकी सम्यक बुद्धि का प्रतिफलन हुआ है। जीवन में दु:ख के बाद सुख आता है, इसीलिये विचार और व्यवहार में समानता लाना बहोत जरुरी है। इन अंतिम नाटकों से यह निष्कर्ष निकलता है कि हिंसा और प्रतिशोध की अपेक्षा दया और क्षमा अधिक महत्वपूर्ण हैं। अपने गंभीर नैतिक संदेश के कारण इन नाटकों का विशेष महत्व है।विलियम शेक्सपियर को अंग्रेजी भाषा के सर्वश्रेष्ठ साहित्यकार और नाटककार के तौर पर जाना जाता है | 26 अप्रैल 1564 को इंग्लैंड के स्ट्रेटफोर्ड में जन्मे शेक्सपियर को “Bird of Heaven” की उपाधि दी गयी थी | जिस वर्ष शेक्सपियर पैदा हुए थे ,उसी वर्ष क्रिस्टोफर मर्लो का भी जन्म हुआ था | शेक्सपियर के पिता जॉन दस्ताना निर्माता थे | माना जाता है कि वो स्ट्रेटफोर्ड के एक गणमान्य नागरिक थे |उस जमाने में स्ट्रेटफोर्ड एक छोटा नगर था जिसकी आबादी डेढ हजार से लेकर दो हजार तक थी |

सन 1592 से 1594 तक संक्रमण बीमारी फैलने के कारण लंदन के थिएटर बंद थे इस दौरान उन्होंने 2 पुस्तकें जिसमें जो कि बहुत ही ज्यादा पसंद की गई उनकी संपत्ति बहुत ही अधिक थी| अपने निधन से पहले उन्होंने 25 मार्च 1616 को अपनी वसीयत तैयार की और 23 अप्रैल 1616 को विलियम शेक्सपियर का देहांत हो गया उनके द्वारा किए गए कार्य और उनकी पुस्तकें आज ही कई लोगों को उनकी भटके हुए मार्ग में लेकर आती हैं उनका ही कहना था कि रोने से दुख कम होता है और खुशी बांटने से बढ़ती है|

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