Swami Vivekanand (स्वामी विवेकानंद)

0
16

स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 में कोलकाता में हुआ था। इनके पिता का नाम विश्वनाथ दत और माता का नाम भुवननेश्वरी देवी था। इनका बचपन का नाम नरेंद्र नाथ दत था। और प्यार से सभी इन्हे नरेंद्र नाम से पुकारते थे। इनका परिवार कुलीन व धनी था। स्वामी विवेकानंद बचपन से तीव्र बुद्धि के थे। और बचपन से ही इनका ध्यान परमात्मा में ज्यादा रहा है। स्वामी विवेकानंद ने युवावस्था में ही संन्यास ले लिया था। और वह बहुत ज्यादा सर्वश्रेष्ठ थे। इन्होने भारत में एक नए समाज की कल्पना की थी। ऐसा समाज जहां कोई भेदभाव न हो । और सभी में दूसरे के प्रति प्रेम भावना हमेशा रहे। स्वामी विवेकानंद बहुत प्रतिभाशाली व्यक्ति थे। जिन्हें वेदों का जान था। जो सभी को जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा दिया करते थे। स्वामी विवेकानंद सभी मानव जीव जंतु से प्रेम किया करते थे। इनकास्वभाव बिल्कुल दयालु भटा था। और इन्होंने लोगो को कई तरह की कलाए भी सिखाई थी। स्वामी विवेकानंद ने भारत में हिन्दू धर्म फैलाने व ऑपनिवेशिक भारत बनाने में अपनी अहम भूमिका निभाई थी। इनके माता पिता ने स्वामी विवेकानंद को अच्छे संस्कार दिए जिससे की उन्हे अच्छा आकार और ऊंची सोच मिल गई। और कहा जाता है कि इनके माता पिता की स्वामी विवेकानंद पर गहटी छाप पड़ी जिससे उन्हे बचपन से ही अपनी माता से इन्होने शिक्षा ग्रहण की और वेदों का जान इनकी माता से मिला। स्वामी विवेकानंद इन सबसे से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने घर में ही ध्यान लगाने लगे और घर से ही जीवन में आगे की ओर बढ़ते चले गए। और वह युवावस्था से भगवान राम, सीता, शिव के आगे ध्यान लगाया करते थे। साधु संतो की बातों से वह हमेशा प्रभावित हुआ करते थे। इसी दौरान वह राष्ट्र हिन्दू धर्म के प्रचारक व संस्कृति के ज्ञानी और नरेंद्र से स्वामी विवेकानंद बने।

स्वामी विवेकानंद जी की शिक्षा-

• स्वामी विवेकानंद का 1871 में ईश्वरचंद्र विद्यासागर मेट्रोपोलिटन संस्थान में एडमिशन करवाया गया।

•उसके बाद 1879 में कोलकाता के प्रेसीडेंसी कॉलेज में एंट्रेंस एग्जाम में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले पहले विद्यार्थी बने।

• पढ़ाई के साथ साथ उन्हे विभिन्न विषयों में भी रुचि थी जैसे साहित्य कला, सामाजिक विज्ञान, दनि शास्त्र, धर्म, इतिहास आदि में रुचि थी साथ ही साथ उन्हें धर्म ग्रंथो में भी बेहद रुचि थी जैसे रामायण, महाभारत, पुटाण, वेद उपनिषद्, भगवतगीता आदि।

• फिर उसके बाद स्वामी विवेकानंद ने अपनी ग्रेजुएशन की पटीक्षा अच्छे अंको से पास की। और साथ साथ उन्होंने वकालत की भी पढ़ाई की।

• स्वामी विवेकानंद पढ़ाई में तो अच्छे ये ही साथ ही साथ योगा, व्यायाम और खेलो में भी निपुण थे। और स्वामी विवेकानंद से आज की युवा पीढ़ी को बहुत ज्यादा सीख लेनी चाहिए।

• स्वामी विवेकानंद को बंगाली भाषा का भी पूटा जान था। स्वामी विवेकानंद ने स्पेंसर की किताब का अनुवाद किया। और साथ ही साथ वह पश्चिमी दनि शास्त्रियों का अध्ययन भी किया। और संस्कृत ग्रंथो बंगाली साहित्य भी पढ़े।

• स्वामी विवेकानंद ने यूटोपीय इतिहास का अध्ययन जनरल असेम्बली इंस्टीट्यूटान में किया।

स्वमी विवेकानंद ने अपने जीवन मे लोगो को हमेशा सफलता हासिल करने तक नही रुकने की बाते कही थी और स्वामी विवेकानंद का नारा “उठो जागो और लक्ष्य मिलने तक रुको मत यह बहुत ज्यादा लोकप्रिय हुआ कि लोगो ने स्वामी विवेकानंद के इस नारे को अपने जीवन मे उत्तर दिया था और कई लोगो ने अपने जीवन मे स्वामी विवेकानंद की बातों को उतार कर सफलता भी हासिल की|

स्वामी विवेकानंद ने भविष्यवाणी की थी कि वे चालीस साल की उम्र तक नहीं रहेंगे। 4 जुलाई, 1902 को, उन्होंने बेलूर मठ में अपने दिनों के काम के बारे में जाना, विद्यार्थियों को संस्कृत व्याकरण पढ़ाया। वह शाम को अपने कमरे में सेवानिवृत्त हो गया और लगभग 9 बजे ध्यान के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। कहा जाता है कि उसे ‘महासमाधि प्राप्त हुई और महान संत का गंगा नदी के तट पर अंतिम संस्कार किया गया|

स्वामी विवेकानंद जी के द्वारा जिंदगी में सफल होने के उपाए –

1. लक्ष्य तक पहुँचने के लिए उठो, जागो और दान करो।

2. जब तक आप खुद पर विश्वास नहीं करते तब तक आप भगवान पर विश्वास नहीं कर सकते। स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि जब तक आप खुद पर विश्वास नही करते तो आप किसी दूसरे यक्ति ओर भगवान पर भी भरोसा नही कर सकते आपको अपने आप पर हमेशा विश्वास होना जरूरी है|

3. स्वामी विवेकानंद ने हमेशा आपने जीवन मे लोगो को दान करने के लिए प्रोतसाहित किया था और बताते थे कि आप जितना दान करते है आपका धन उतना बढ़ता है|

4. आपको अंदर से बाहर की तरफ बढ़ना होगा। आपको कोई नहीं सिखा सकता, कोई भी आपको आध्यात्मिक नहीं बना सकता। कोई दूसरा शिक्षक नहीं है बल्कि आपकी अपनी आत्मा है। विवेकानंद जी ने बताया कि आपके जीवन का सबसे बड़ा गुरु आपकिं आत्मा होत्ती है हर काम करने से पहले अपनी आत्मा से आने वाली आवाज की सुनो आपका हर काम सफल होगा|

5. दुनिया महान व्यायामशाला है जहां हम खुद को मजबूत बनाने के लिए आते हैं। विवेकानंद जी हमेसा आपने जीवन मे योग करने पर जोर देते थे और लोगो को भी योगा करने की सलाह देते थे उनका मानना था कि योगा करने से यक्ति स्वस्थ रहता है|

6. ब्रह्मांड में सभी शक्तियां पहले से ही हमारी हैं। यह हम ही हैं जिन्होंने हमारी आंखों के सामने हाथ रखा है और रोते हुए कहा कि यह अंधेरा है।

7. हम वही हैं जो हमारे विचारों ने हमें बनाया है; इसलिए इस बारे में ध्यान रखें कि आप क्या सोचते हैं। शब्द गौण हैं। विचार रहते हैं; वे दूर यात्रा करते हैं।

8. निंदा कोई नहीं: यदि आप मदद के लिए हाथ बढ़ा सकते हैं, तो ऐसा करें। यदि तुम नहीं कर सकते, तो हाथ जोड़ो, अपने भाइयों को आशीर्वाद दो, और उन्हें अपने रास्ते जाने दो।

9. सत्य को एक हजार अलग-अलग तरीकों से बताया जा सकता है, फिर भी हर एक सत्य हो सकता है।

Swami Vivekanand short Biography

Bio/Wiki

  • Name: Narendra nath dutt
  • Date Of Birth: 12 January 1863
  • Birthplace: Kolkata, West Bengal
  • Hometown: Kolkata, West Bengal
  • Nationality: Indian
  • Eduction: Bachelor of arts
  • Profession: Indian Patriotic Saint and Monk

Physical Status

  • Height: 5.9 feet
  • Eye Color: Black
  • Hair Color: Black

Family Information

  • Father: Vishwanath Datta
  • Mother: Bhuvneshwari Devi
  • Brother: Bhupendranath Datta, Mahendranath Datta
  • Sister: Swarnamoyee Dei
  • Relationships: Unmarrried

 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here