Ramkrishna Paramhansa Biography In Hindi (रामकृष्ण परमहंस की जीवनी)

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“भगवान हर जगह है और कण-कण में हैं,                                 लेकिन वह एक आदमी में ही सबसे अधिक प्रकट होते है,             इस स्थिति में भगवान के रूप में आदमी की सेवा ही                     भगवान की सबसे अच्छी पूजा है।”

                               -रामकृष्ण परमहंस

आध्यात्मिक जीवन ही श्रेष्ठ है और वास्तविक है यह सिद्ध करके दिखाने वाले महापुरुष की बात आज हम करने वाले हैं जिनका नाम है श्री रामकृष्ण परमहंस | श्री रामकृष्ण परमहंस जी का जन्म सन 1833 में हुगली के समीप कमालपुकर मैं हुआ था उनके पिताजी का नाम खुदीराम चट्टोपाध्याय था खुदीराम कटप्पा जी के तीन बेटे थे जिनमें से हमारे चरित्र नायक गदाधर सबसे छोटे बेटे थे रामकृष्ण परमहंस जी बचपन से ही बहुत ज्यादा नरम स्वभाव के थे उनकी वाणी और भाषा शैली बहुत ही मधुर और मनोहर थी इसी कारण से उनके आसपास के लोग हमेशा बहुत ज्यादा प्रसन्न रहते थे उनके चरित्र के कारण उनके आसपास के गांव के लोग उन्हें अपने घर ले जाकर भोजन कराया कर देते रामकृष्ण परमहंस जी का मन भगवान कृष्ण के चरित्र सुनने और उनकी लीला के बारे में जानने और बताने में बहुत अधिक लगता था|

16 वर्ष की अवस्था में रामकृष्ण परमहंस जी पाठशाला भेजे गए उनका पढ़ने में मन बिल्कुल भी नहीं लगता था और वह पंडितों की बात विवादों से घबरा जाते थे और दुखी होकर एक दिन बड़े भाई से स्पष्ट बोल दिया कि भाई पढ़ने लिखने से क्या होगा इस पढ़ने-लिखने का उद्देश्य धन और धन्य पैदा करना है मैं तो विद्वान बनना चाहता हूं जिससे मुझे परमात्मा की शरण में जाने का मौका मिले ऐसा कहकर उस दिन से उन्होंने पढ़ाई छोड़ दी और वे भगवान के स्मरण करने लगे रामकृष्ण परमहंस जी का मन पूजा पाठ में बहुत ज्यादा लगता था उन्होंने काली देवी का मंदिर बनवाया था और वहां सुबह शाम भक्ति किया करते थे लेकिन उन पर विश्वास करने से भी हिचकी जाते थे वह हमेशा ही अपने मन में किया करते थे कि क्या जगत जननी मां काली सिर्फ सपने में है या कभी स्पष्ट दर्शन भी देंगे तो कभी वह मन लगाकर पूजा पाठ किया करते थे |

“यदि आप पागल ही बनना चाहते हैं तो सांसारिक वस्तुओं के लिए मत बनो, बल्कि भगवान के प्यार में पागल बनों।”

उसके बाद राम कृष्ण परमहंस जी एक साधु के पास पहुंचे जिनका नाम तोतापुरी था उनके साथ रहने लगे और धीरे धीरे उनसे ज्ञान लेते रहे उन्होंने रामकृष्ण परमहंस जी को शास्त्र का ज्ञान दिया और धीरे-धीरे वह धर्म व संप्रदायों में आगे बढ़ते हुए चले गए उसके बाद उन्होंने निश्चय किया कि वह तीर्थ यात्रा के लिए निकलेंगे और एक बार भारतवर्ष घूमने के लिए दक्षिणेश्वर आकर ठहर गए यही पर उन्होंने बड़े-बड़े विद्वान धर्म नष्ट धनवान आदि सभी लोगों से मिले और उनके स्वभाव को देखकर अच्छी खासी भीड़ होने लगी रामकृष्ण परमहंस जी ने कई सारे कार्य किए और कई सारी उपाध्याय भी प्राप्ति की समय के साथ उनका शरीर ढलता गया और 1 दिन श्री रामकृष्ण परमहंस जी के गले में पीड़ा होने लगी और गंड माला का धारण कर लिया और उन्हें इस चीज का एहसास भी हो गया था कि वह अब उनका संसार से जाने का समय आ गया है 3 महा तक बीमार रहने के बाद उन्होंने अपनी समाधि ली|

Ramakrishna Paramhansa short Biography

Bio/Wiki

  • Name: Ramakrishna Paramhansa
  • Date Of Birth: 1833
  • Birthplace: Kamarpukur, British India
  • Nationality: Indian
  • Profession: Philosopher

Family Information

  • Father: Khudiram Chattopadhyaya
  • Mother: Chandramani Devi
  • Brother: (Information not available)
  • Sister: (Information not available)
  • Relationships: Unmarrried

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