Prithviraj Chauhan biography in hindi(पृथ्वीराज चौहान)

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भारत देश का इतिहास जितना गहरा है उसमें उतनी ही ज्यादा वीर योद्धा भी शामिल है अब चाहे आप हाथ में रानी लक्ष्मीबाई की महाराणा प्रताप की छत्रपति शिवाजी महाराज की तरह और भी हजारों लोगों की हालांकि देश के अंदर समय-समय पर बहुत सारे ऐसे लोगों ने वीरता का प्रमाण दिया है कि एक वीडियो में उनका नाम लेना पॉसिबल नहीं है लेकिन इन सभी वीरों को नमन करता है और वीडियो भी ऐसे ही योद्धा के बारे में बात करने वाले हैं इनका लोहा पूरी दुनिया मानती है या मैं बात कर रहा हूं जी हां मैं बात कर रहा हूं भारत के वीर पृथ्वीराज चौहान की किरोड़ी अपने आप को कुछ इस तरह से तैयार किया था कि सिर्फ आवाज सुनकर ही बिना देखे हुए दुश्मनों पर निशाना साथ सकते थे पृथ्वीराज चौहान ने मोहम्मद गौरी जैसी खूंखार और खतरनाक दुश्मन को ना केवल एक दो बार बल्कि 17 बार हराया था मुगल शासन से पहले दिल्ली की गद्दी पर बैठने वाला अंतिम हिंदू राजा पृथ्वीराज चौहान और दोस्तों इस महान योद्धा के ऊपर ही बॉलीवुड में भी एक मूवी बनाई जा रही है जिसका नाम है तस्वीर आज और इस मूवी में अक्षय कुमार लीड रोल में दिखाई पड़ रहे हैं हम जानते हैं की की तो चलिए जानते हैं पृथ्वीराज चौहान की जिनके कारण आज सैकड़ों साल बाद भी सैकड़ों साल बाद ही उन्हें याद किया जाता है इस कहानी की शुरुआत होती है 1149 से पृथ्वीराज चौहान का जन्म अजमेर में समेस्वर चौहान के घर हुआ था साथ ही उनकी माता का नाम गंगोरा देवी था और पृथ्वीराज चौहान जी बचपन से ही घुड़सवारी और तलवारबाजी के बहुत ही ज्यादा शौकीन थे लेकिन पृथ्वीराज चौहान की सबसे खास विशेषता यह थी कि वह शब्दभेदी बाण चलाने में निपुण थे दरअसल इसका मतलब यह होता है आंख बंद होने के बाद भी सिर्फ आवाज सुनने से बिल्कुल सटीक निशाना लगा लिया करते थे और जब इन सभी विशेषताओं का पता पृथ्वीराज जी के नाना और उस समय दिल्ली के राजा अनंगपाल को लगी तब उन्होंने पृथ्वीराज चौहान को दिल्ली का राजा बनाने का निर्णय किया और इसी कड़ी पृथ्वीराज चौहान सिर्फ 16 साल की उम्र में दिल्ली की राजगद्दी को संभाला और राजा बनने के बाद उन्होंने किले का निर्माण करवाया जिसका नाम था पिथौरागढ़ हालांकि पृथ्वीराज चौहान का बचपन अजमेर में गुजरा इसी वजह से दिल्ली का राजा बनने के बाद भी उनका मन अक्सर अजमेर में ही अटका रहता था और इसी वजह से आगे चलकर उन्होंने दोनों नगरों को राजधानी बना दिया पृथ्वीराज चौहान कई सारे विजय अभियान चलाकर उन्होंने अपने साम्राज्य को पंजाब गुजरात गुजरात में भी अपना परचम लहराया हालांकि इतनी सारी तरक्की के बाद कई सारे राज्यों में उनके प्रति चरण की भावना भी उत्पन्न होने लगी उन्हीं राज्यों में एक राजा थे जय जय जिन की राजधानी थी कन्नौज हालांकि जैसी हाला की जय जितना पृथ्वीराज चौहान से जलते थे उनकी पुत्री संयोगिता उतना ही महाराणा प्रताप के वीरता का बखान किया करती थी और वह पृथ्वीराज को अपना दिल दे बैठी थी हालांकि जब जयचंद्र को इस बात की खबर हुई तब वह गुस्से से आगबबूला हो गए और उन्होंने यह निश्चय किया कि जल्द से जल्द हुआ अपनी बेटी की शादी कहीं अच्छे राज के राजा से कर देंगे और इसी के साथ ही पृथ्वीराज चौहान को भी अपमानित करने की साजिश भी कर ली और साथ ही पृथ्वीराज चौहान को नीचा दिखाने के लिए जयचंद ने एक स्वयंवर को आयोजित किया जिसमें की संयोजकता अपने पसंद के बन सकती है हालांकि इस स्वयंवर में सभी छोटे-बड़े राजाओं को निमंत्रण मिला लेकिन उन्होंने पृथ्वीराज चौहान को छोड़ दिया और उन्होंने पृथ्वीराज चौहान की मूर्ति बनाई और मंडप के द्वारपाल के रूप में खड़ी कर दी हालांकि खबर इस बात की खबर जब उनकी बेटी को लगी तो वह बहुत ही ज्यादा दुखी हुई और स्वयंवर में किसी वर्ग को भी ना सुनते हुए वह माला पृथ्वीराज चौहान की मूर्ति को पहना दिया और यह सब देखकर विवाह में आए सभी छोटे बड़े राजा हक्के बक्के रह गए और असली कहानी तो यहां होती है कि वह मूर्ति के पीछे से सच में निकले और संयोगिता को घोड़े में बैठा कर अपने राज ले आए और इसी दौरान अफगानिस्तान का राजा मोहम्मद गौरी भारत की ओर बढ़ रहा था और उन्हें उसने पश्चिम पंजाब तक अपना शासन भी स्थापित कर लिया और पृथ्वीराज चौहान की राज्य की सीमा भटिंडा पर भी उसने अपना परचम लहरा दिया हालांकि जैसे ही इस बात की खबर राजा बोला की और वैसे ही वह अपनी सेना को लेकर पहुंच गए और वहां मोहम्मद गौरी की सेना जीत के नशे में चूर थी वही पृथ्वीराज की सेना देश भक्ति में लीन थी और उसके बाद पृथ्वीराज चौहान और मोहम्मद गौरी के द्वारा हुए युद्ध में मोहम्मद गोरी को हार का सामना करना पड़ा उसके बाद भी मोहम्मद गोरी ने हार नहीं मानी और लगातार 16 बार आक्रमण किया लेकिन हर बार ही उसे हार का सामना करना पड़ा हालांकि जब इस बात की खबर पृथ्वीराज चौहान की पत्नी संयोगिता के पिता को मालूम चली तो उन्होंने पृथ्वीराज से अपना बदला लेने के लिए इस मौके को हाथ से नहीं जाने दिया और इसी कड़ी में ही जयचंद मोहम्मद गौरी के साथ मिल गया बहुत अच्छी राज को हराने के लिए साजिश करने लगा

2 साल बाद 1192 में मोहम्मद गौरी ने पृथ्वीराज चौहान को युद्ध के लिए ललकारा और इस बार मोहम्मद गौरी के पास विशालकाय सेना भी थी और इस बार भी पिछले हारों की तरह इस बार भी मोहम्मद गौरी को लौट जाने की सलाह दी और मोहम्मद गौरी ने पृथ्वीराज चौहान को चकमा देने के लिए अपनी सेना को पीछे कर लिया और इसी वजह से पृथ्वीराज चौहान को यह लगा कि मोहम्मद गौरी उनकी बात को मान गया हालांकि मोहम्मद गोरी समय का इंतजार कर रहा था जब पृथ्वीराज चौहान की सर्वे सैनिक पूजा पाठ में व्यस्त थे तब मोहम्मद गौरी ने उन पर हमला कर दिया और पृथ्वीराज चौहान को चारों तरफ से घेर कर उन्हें और उनके मित्र को बंदी बना लिया हालांकि बनाने के बाद पृथ्वीराज चौहान को मोहम्मद गौरी के समक्ष प्रस्तुत किया गया तुम पृथ्वीराज चौहान ने मोहम्मद गौरी से कहा कि तुम मुझे मार दो नहीं तो आगे चलकर तुम्हें बहुत ही ज्यादा पछताना पड़ेगा हालांकि 17 बार हारा हुआ मोहम्मद गौरी पृथ्वीराज पृथ्वीराज चौहान को घुट घुट कर मर ता हुआ देखना चाहता था और इसी वजह से उसने पृथ्वीराज चौहान को ना माने की बात कही हालांकि दरबार में पृथ्वीराज चौहान सर ऊंचा कर के सीना तान के खड़े हुए थे और यह देखकर मोहम्मद गोरी ने कहा कि तुम राजा के दरबार में खड़े हो सर झुका कर और अपनी नजरों को नीचे करके मुझसे बात करो हालांकि इसका जवाब दिया जिसके कारण सभी के रोंगटे खड़े हो गए प्रतिक राज चौहान ने कहा की एक सच्चे राजपूत की नजरें सिर्फ मौत ही झुका सकती है और यह बात सुनकर मोहम्मद गोरी ने पृथ्वीराज चौहान की दोनों आंखें खोलने का आदेश दे दिया और अंत में उन्हें अंधा करके जेल में डाल दिया और उनके प्रिय मित्र कोई यह दर्द देखा नहीं गया और उन्होंने मोहम्मद गौरी को सबक सिखाने का स्थान दिया उनके प्रिय मित्र का नाम चंद्रवरदाई था और उसके बाद चंद्रवरदाई ने मोहम्मद गौरी के दरबार में उपस्थित होने की इच्छा जाहिर की और मोहम्मद गौरी को बताया कि पृथ्वीराज चौहान बिना देखे ही लक्ष्य पर सटीक निशाना लगा सकते हैं और अगर भरोसा ना हो तो राजा के सामने वह अपने प्रिय मित्रों को यह करतब दिखाने का मौका देंगे और यह बात पता लगने के बाद मोहम्मद गौरी ने पृथ्वीराज चौहान और उसके मित्र को अपने दरबार में उपस्थित होने का आदेश दिया और इस बार प्रतिक राज चौहान को तीर और धनुष दरबार अपनी कला का प्रदर्शन करने के लिए खड़ा कर दिया पृथ्वीराज चौहान ने कहा कि मैं एक राजा हूं और मैं सिर्फ एक राजा की बात ही मानूंगा और सच मानिए यह बात सुनकर मोहम्मद गौरी खुशी से झूम उठा और खुद को राजा सुनकर उसने निशाना लगा ने का आदेश दिया और जैसा कि मैंने आपको बताया कि पृथ्वीराज चौहान को शब्दभेदी बाण का ज्ञान था अजय ऐसे ही पृथ्वीराज चौहान ने मोहम्मद गौरी के आवाज को सुनें वह अपने वार्ड की दिशा को परिवर्तित करके मोहम्मद गौरी के तरफ बाढ़ को छोड़ दिया और मोहम्मद गौरी की मृत्यु उसी झड़प हो गई इस घटना के बाद उन्हें पता था कि उनके मित्र को और पृथ्वीराज चौहान को जिंदा नहीं रहने दिया जाएगा और वह दुश्मनों से मरने के बाद अरे में सोचने की बजाय एक दूसरे को छुरा मारकर आत्महत्या कर ली और जब पृथ्वीराज चौहान की पत्नी को उनकी मृत्यु की खबर पता चली तब उनकी पत्नी ने भी अपने प्राण त्याग दिए हालांकि इस महान योद्धा को आज भी लोग याद करते हैं और जब कभी भी साथ ही लोगों का नाम होता है तब महाराणा प्रताप पृथ्वीराज चौहान जैसे राजपूतों का नाम अवश्य दिया जाता है कैसा लगा आपको यह पढ़कर कमेंट बॉक्स में मुझे जरूर बताइएगा धन्यवाद

 

जीवन परिचय
वास्तविक नाम पृथ्वीराज चौहान
उपनाम भारतेश्वर, पृथ्वीराजतृतीय, हिन्दूसम्राट्, सपादलक्षेश्वर, राय पिथौरा
व्यवसाय क्षत्रिय
व्यक्तिगत जीवन
जन्मतिथि 1 जून 1163 (आंग्ल पंचांग के अनुसार)
जन्मस्थान पाटण, गुजरात, भारत
मृत्यु तिथि 11 मार्च 1192 (आंग्ल पंचांग के अनुसार)
मृत्यु स्थल अजयमेरु (अजमेर), राजस्थान
आयु (मृत्यु के समय) 28 वर्ष
राष्ट्रीयता भारतीय
गृहनगर सोरों शूकरक्षेत्र, उत्तर प्रदेश (वर्तमान में कासगंज, एटा)
कुछ विद्वानों के अनुसार जिला राजापुर, बाँदा (वर्तमान में चित्रकूट)
धर्म हिन्दू
वंश चौहानवंश
परिवार पिता – सोमेश्वर
माता – कर्पूरदेवी
भाई – हरिराज (छोटा)
बहन – पृथा (छोटी)
प्रेम संबन्ध एवं अन्य जानकारियां
वैवाहिक स्थिति विवाहित
पत्नी • जम्भावती पडिहारी
• पंवारी इच्छनी
• दाहिया
• जालन्धरी
• गूजरी
• बडगूजरी
• यादवी पद्मावती
• यादवी शशिव्रता
• कछवाही
• पुडीरनी
• शशिव्रता
• इन्द्रावती
• संयोगिता गाहडवाल

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