महात्मा गाँधी ( Mahatma Gandhi )

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महात्मा गाँधी का पूरा नाम मोहन दास करम चंद्र गाँधी था। इनका जन्म 02 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। महात्मा गाँधी के पिता का नाम करम चंद्र गाँधी और माँ का नाम पुतली बाई था। गाँधी जी के पिता की 4 पत्नियाँ थी। गाँधी जी की माँ उनके पिता की चौथी पत्नी थी। गाँधी जी बचपन में बहुत ज्यादा शर्मीले थे वो ज्यादा बोला नहीं करते थे। 1874 में गाँधी जी पोरबंदर को छोड़ कर राजकोट में रहने लगे। गाँधी जी जब 9 साल के थे तब वो राजकोट के लोकल स्कूल में पढ़ते थे और 11 साल की उम्र में अपनी हाई स्कूल की पढाई को पूरा किया जिसमे वो आइर्थ्मेटिक,हिस्ट्री और गुजरती लैंग्वेज सीखा करते थे। गाँधी जी बचपन में पढाई में तो बहुत ही ज्यादा अच्छे थे लेकिन उनका इंटरस्ट खेल जैसी चीज़ो में बिलकुल नहीं था।

1883 में उनकी माता पिता ने उनकी शादी उनसे 1 साल बड़ी लड़की से कर दी जिनका नाम कस्तुरबा बाई था। शादी तो हो गई थी लेकिन वो दोनों एक साथ नहीं रहा करते थे क्योकि गाँधी जी का ये कहना था की 13 साल की उम्र में शादी करने का हमारे लिए मतलब सिर्फ नए कपड़े पहनना और मिठाई खाना था और पार्टी का मज़ा लेना था। गाँधी जी जैसे-जैसे बड़े होते गए वैसे-वैसे उनकी उनकी पत्नी के प्रति प्यार बढंने लगा और जब वो 18 साल के थे तब उनकी पत्नी ने पहली संतान को जन्म दिया, लेकिन कुछ दिनों बाद ही उसकी मौत हो गई। उसी समय गाँधी जी ने अपने ग्रजुएशन को आहमदबाद से पूरा किया था। और तब उन्हें किसी ने कहा की अपनी आगे की पढाई के लिए इंडिया से बाहर जाना चाहिए और उसके कुछ समय बाद ही गाँधी जी की दूसरी संतान का जन्म हुआ जिसका नाम हीरा लाल था। गाँधी जी की माँ चाहती थी की वे अपने परिवार को छोड़ कर और इतनी छोटी उम्र में इंडिया के बहार न जाए लेकिन महात्मा गाँधी ने पूरा मन बना किये थे की वे इंग्लैंड जा कर लॉ की पढाई करे।

इंग्लैंड जाते समय महात्मा गाँधी ने अपनी माँ से वादा किया की वे वह नॉन-वेज नहीं खाएगे,अल्कोहल और गुटका और सिगरेट जैसी चीज़ो को हाथ नहीं लगाएगे। और इसी के साथ गाँधी जी ने 1888 में अपनी लॉ (LAW) की पढाई ले लिए अपने घर परिवार को छोड़ कर इंग्लैंड के लिए निकल गए थे वह जा कर अपनी पढाई पूरी की और साथ ही साथ अपनी कमजोरी पर पूरा ध्यान दिया यानी लोगो से बाद करना और शर्मीले पन को दूर किया। गाँधी जी जब इंग्लैंड में थे तभी उनकी माँ की मृत्यु हो गई। पर ये बात उन्हे किसी ने नहीं बताया की उनकी माँ की मौत हो गई है और जब 1891 को वो अपनी स्टडी को कम्पलीट कर के वापस आए तब उनको ये बात पता चली की उनकी माँ की मौत हो गई है ये बात सुन कर गाँधी को बहुत ज्यादा दुःख हुआ। चुकी उन्होने अपनी लॉ की पढाई पूरी कर ली थी इसी लिए वो कोर्ट में लोअर के रूप में अभ्यास करने जाया करते थे।

एक बार की बात है की 1893 में साउथ अफ्रीका एक आर्डर आया की वो साउथ अफ्रीका में लोअर के रूप में काम करेंगे। गाँधी जी ने उस नौकरी को हाथ से जाने नहीं दिया और उसी साल वो साउथ अफ्रीका के लिए निकल गए। साउथ अफ्रीका में एक बार की बात है की गाँधी जी को कोर्ट जाना था। इस लिए वो ट्रेन की फस्ट क्लास की टिकट को ले कर फस्ट क्लास में सफर कर रहे थे क्योकि अंग्रेज साउथ अफ्रीका में राज कर रहे थे इसलिए वह अंग्रजो की चलती थी। अंग्रेज उच-नीच ,छुआ -छूत जैसी चीज़ो को बहुत बढ़ावा दिया करते थे। और इसलिए जब अंग्रजो ने गाँधी जी को फस्ट क्लास में हाई-सुसाइटी के लोगो के साथ देखा तो उन्होंने गाँधी जी से बोला की उन्हें थर्ड क्लास में सफर करना होगा और परेशान करने लगे। लेकिन गाँधी जी ने थर्ड क्लास में जाने से साफ मन कर दिया क्योकि उनकी पास फस्ट क्लास का टिकट था। लेकिन अंगेजो ने गाँधी जी की एक भी नहीं सुनी और गाँधी जी का हाथ बांध कर उन्हें बहुत मारा और वही स्टेशन में उतर दिया। इस घटना के बाद गाँधी जी को अपने सम्मान की लिए बहुत बड़ा दक्का भी लगा और वो वह का कम ख़तम कर के इंडिया वापस आ गए।

मोहनदास करमचंद गाँधी विदेश में दो दशक रहने के बाद जनवरी 1915 में अपनी गृहभूमि वापस आए। इन वर्षों का अधिकांश हिस्सा उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में बिताया। यहाँ वे एक वकील के रूप में गए थे और बाद में वे इस क्षेत्र के भारतीय समुदाय के नेता बन गए। 1915 में जब महात्मा गाँधी भारत आए तो उस समय का भारत 1893 में जब वे यहाँ से गए थे तब के समय से अपेक्षाकृत भिन्न था। अधिकांश प्रमुख शहरों और कस्बों में अब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की शाखाएँ थीं। 1905-07 के स्वदेशी आन्दोलन के माध्यम से इसने व्यापक रूप से मध्य वर्गों के बीच अपनी अपील का विस्तार कर लिया था। इस आन्दोलन ने कुछ प्रमुख नेताओं को जन्म दिया, जिनमें महाराष्ट्र के बाल गंगाधर तिलक, बंगाल के विपिन चंद्रपाल और पंजाब के लाला लाजपत राय हैं। ये तीनों लाल, बाल और पाल के रूप में जाने जाते थे। इन तीनों का यह जोड़ उनके संघर्ष के अखिल भारतीय चरित्र की सूचना देता था क्योंकि तीनों के मूल निवास क्षेत्र एक दूसरे से बहुत दूर थे।

गाँधी जी ने कई सारे आंदोलन की शुरुआत की जिनमे से –

  • चंपारण आंदोलन –गांधी जी द्वारा सन 1917 में चंपारण आंदोलन चलाया गया.यह आंदोलन बिहार के चंपारण जिले में चलाया गया था. चंपारण आंदोलन को चंपारण सत्याग्रह के नाम से भी जाना जाता है. यह आंदोलन लैंडलॉर्ड द्वारा किसानों पर हो रहे अत्याचार के विरोध में चलाया गया था. लैंडलॉर्ड किसानों को नील की खेती करने के लिए मजबूर कर रहे थे और उन्हें एक निश्चित मूल्य पर बेचने के लिए विवश कर रहे थे. किसानों को लैंडलॉर्ड का किया यह अत्याचार रास नहीं आ रहा था. किसान इस से मुक्ति पाना चाहते थे तथा किसानों ने इस अत्याचार से बचने के लिए गांधी जी से मदद मांगी. गांधी जी चंपारण के हालात को देखने के लिए चंपारण गए. जहां हजारों की भीड़ ने गांधीजी को घेर लिया और किसानों ने अपनी सारी समस्याएं गांधी जी को बताई. गांधी जी के साथ इस जनसमूह को देखकर ब्रिटिश सरकार भी हरकत में आ गई और सरकार ने अपनी पुलिस के द्वारा गांधी जी को जिला छोड़ने का आदेश दिया. गांधी जी ने यह आदेश मानने से इनकार कर दिया इस पर पुलिस ने गांधीजी को गिरफ्तार कर लिया. गांधी जी को अगले दिन कोर्ट में हाजिर होना था. लेकिन गांधीजी के हाजिर होने से पहले ही कोर्ट में हजारों किसानों की भीड़ जमा हो गई गांधी जी के समर्थन में नारे लगने लगे.तभी मैजिस्ट्रेट ने गांधीजी को बिना जमानत के छोड़ने का आदेश दे दिया लेकिन गांधीजी ने इस आदेश को नहीं माना और उन्होंने कानून के अनुसार सजा की मांग की.परन्तु  मजिस्ट्रेट ने फैसला स्थगित कर दिया और इसके बाद गांधी जी अपने कार्य पर निकल पड़े और चंपारण आंदोलन की शुरुआत हो गई. गांधी जी के आंदोलन में किसानों के साथ आम जनता ने भी साथ दिया तथा मजबूर होकर ब्रिटिश सरकार को एक कमेटी गठित करनी पड़ी तथा महात्मा गांधी को उस का सदस्य बनाया गया. गांधीजी ने उन सभी प्रस्ताव को स्तगित कर दिया जो किसानो के विरोध में थे. इस तरह गाँधी जी के भारत में चलाये गए प्रथम चम्पारण सत्याग्रह जीत हुई.
  • खेड़ा सत्याग्रह-सन 1918 में गुजरात के खेड़ा नामक गांव में बाढ़ आ गई तथा किसानों की फसल तबाह हो गई. जिससे किसान ब्रिटिश सरकार द्वारा लगाए जाने वाले टैक्स भरने में अक्षम हो गए. किसानों ने इस दुविधा से निकलने के लिए गांधीजी की सहायता मांगी तब गांधी जी ने किसानों को टैक्स में छूट दिलाने के लिए आंदोलन किया जिसे ‘खेड़ा सत्याग्रह’ के नाम से जाना जाता है इस आंदोलन में गांधी जी को किसानों के साथ जनता का भरपूर समर्थन मिला और आखिरकार मई 1918 में ब्रिटिश सरकार को अपने टैक्स संबंधी नियमों में संशोधन कर किसानों को राहत देने की घोषणा करनी पड़ी और इस तरह यह आंदोलन भी सफल हुआ|
  • असहयोग आंदोलन-असहयोग आंदोलन सितंबर 1920 में चलाया गया. इस आंदोलन को चलाने के पीछे कई अहम कारण थे. सन 1919 में ब्रिटिश सरकार द्वारा रौलट एक्ट पास किया गया जिसे भारतीय जनता ने ‘काला कानून’ की संज्ञा दी. रौलट एक्ट के विरोध में 13 अप्रैल 1919 को पंजाब के जलियांवाला बाग में एक सभा बुलाई गई जिसमें हजारों की भीड़ जुटी. वहां ब्रिटिश जनरल डायर भी अपनी टुकड़ी के साथ पहुंच गया और उसने निहत्थी जनता पर गोलियां चलाने का आदेश दे दिया. जिस कारण हजारों की संख्या में मासूम बच्चे, स्त्रियां, पुरुष मारे गए. ब्रिटिश सरकार के इस दुस्साहस से ब्रिटिश सरकार चौतरफा विरोध में घिर गई. तथा गांधीजी ने ब्रिटिश सरकार के विरोध में सितंबर 1920 में असहयोग आंदोलन की घोषणा कर दी. असहयोग आंदोलन 1920 से लेकर 1922 तक चला.1922 में चौरा चौरी कांड के कारण गांधी जी को असहयोग आंदोलन को वापस लेना पड़ा. अपने शुरुआती दौर में असहयोग आंदोलन चरम पर था तथा इसके अंतर्गत सरकारी पदों का, स्कूल का, सरकारी अदालतों का बहिष्कार करना, विदेशी वस्तुओं का परित्याग करना, शामिल था. लेकिन इस आंदोलन के दौरान आंदोलनकारियों द्वारा चोरा चोरी नामक स्थान पर हिंसा की घटना हो गई उनके द्वारा एक थानेदार और 21 सिपाहियों को जलाकर मार डाला गया. असहयोग आंदोलन गांधी जी के अहिंसा के रास्ते को छोड़ने लगा था इसी कारण सन 1922 को गांधी जी ने असहयोग आंदोलन को वापस ले लिया|
  • नमक सत्याग्रह/ दांडी मार्च –ब्रिटिश सरकार द्वारा नमक बनाने पर लगाएं प्रतिबंध को तोड़ने के लिए महात्मा गांधी ने नमक सत्याग्रह आंदोलन शुरू किया इस आंदोलन की शुरुआत 12 मार्च 1930 को हुई. इसके तहत गांधीजी ने दांडी मार्च निकाला.गांधी जी अपने 72 अनुयायियों के साथ साबरमती आश्रम से पैदल चलकर 24 दिनों में 240 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर दांडी गांव समुन्दर तट पर पहुंचे.गांधीजी ने समुंदर के किनारे पहुंचकर नमक बनाकर ब्रिटिश सरकार के नमक कानून को तोड़ा. गांधी जी के नमक बनाने के बाद पूरे देश में नमक कानून को तोड़ा गया.यही वह घटना थी, जिसके चलते महात्मा गाँधी दुनिया की नज़र में आए. इस यात्रा को यूरोप और अमेरिकी प्रेस ने व्यापक कवरेज दी.यह पहली राष्ट्रवादी गतिविधि थी, जिसमें औरतों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. समाजवादी कार्यकर्ता कमलादेवी चट्टोपाध्याय ने गाँधीजी को समझाया कि वे अपने आंदोलनों को पुरुषों तक ही सीमित न रखें. कमलादेवी खुद उन असंख्य औरतों में से एक थीं, जिन्होंने नमक या शराब क़ानूनों का उल्लंघन करते हुए सामूहिक गिरफ़्तारी दी थी.नमक यात्रा के कारण ही अंग्रेज़ों को यह अहसास हो गया था कि अब उनका राज बहुत दिन तक नहीं टिक पायेगा और उन्हें भारतीयों को भी सत्ता में हिस्सा देना होगा. गाँधी जी का किया यह आंदोलन भी सफल रहा|
  • भारत छोड़ो आंदोलन-भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत महात्मा गांधी जी द्वारा अगस्त 1942 में की गई थी. यह आंदोलन गांधी जी द्वारा चलाए गए आंदोलनों में तीसरा बड़ा आंदोलन था. यह आंदोलन अब तक के सभी आंदोलनों में सबसे अधिक प्रभावी रहा तथा इस आंदोलन से निपटने के लिए अंग्रेजी सरकार को एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ा. परंतु इसके संचालन में हुई गलतियों के कारण यह आंदोलन जल्दी ही धराशाही हो गया. इस अंदोलन को भारत में एक साथ शुरू नहीं किया गया था और यह यही अहम कारण रहा कि यह आंदोलन जल्दी ही धराशाही हुआ. इस आंदोलन के अंतर्गत भारतीयों को ऐसा लग रहा था कि अब हमें आजादी मिल ही जाएगी. उनकी इसी सोच के कारण आंदोलन कमजोर होना शुरू हो गया और जल्दी ही धराशाई हो गया. लेकिन इस आंदोलन ने ब्रिटिश हुकूमत को यह एहसास करा दिया था कि अब भारत में उनका शासन और नहीं चल सकता उन्हें आज नहीं तो कल भारत छोड़कर जाना ही होगा|

15  अगस्त 1947 को हमारा भारत देश अंग्रेजो की गुलामी से आज़ाद हो गया और गाँधी जी के द्वारा किये गए सारे आंदोलन सफल रहे|

31 जनवरी 1948 की शाम को गाँधीजी की दैनिक प्रार्थना सभा में एक हत्यारे ने उनको गोली मारकर उस चिराग को बुझा दिया जो 70 वर्षों से हमारे इस देश में उजाला फैलात आ रहा था। गाँधीजी की मृत्यु से चारों ओर गहरे शोक की लहर दौड़ गई। भारत भर के राजनीतिक फलक पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। इस तरह गांधीजी “एकता के जिस उद्देश्य के प्रति हमेशा समर्पित रहे उसी के लिए शहीद हो गए।”

                       गांधीजी के मुख से निकले आखिरी शब्द थे – हे राम, हे राम, हे राम…

Mahatma Gandhi Short Biography

Bio/Wiki

  • Name: Mohandas karam chandra gandhi(bapu)
  • Date Of Birth: 02 October 1869
  • Birthplace: Porbandar, Gujrat
  • Hometown: Rajkot, Gujrat
  • Nationality: Indian

Family Information

  • Father: Karam Chandra Gandhi
  • Mother: Putlibai
  • Wife: Kasturwa Gandhi

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