Kalpana Chawla (कल्पना चावला)

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कल्पना चावला जी के बारे में कौन नहीं जानता वह एक ऐसी महिला थी जिन्होंने भारतीय मूल के होते हुए चांद पर कदम रखा था आइए जानते हैं उनके जीवन के बारे में-

कल्पना चावला जी का जन्म 17 मार्च 1962 को भारत के एक छोटे से शहर करनाल में हुआ था | जो पहले पंजाब का हिस्सा था लेकिन अब हरियाणा के हिस्से में आता है इनके पिता जी का नाम बनारसी लाल चावला था और माता जी का नाम sanjyoti जावला था कल्पना चावला जी के बचपन का नाम लाडला था| और कुछ लोग इन्हें मोटो के नाम से पुकारते थे वैसे तो इनका नाम कल्पना ही था जिसका अर्थ इमैजिनेशन होता है इनके नाम से ही पता चलता है कि यह कितनी काल्पनिक शेर बालिका रही होंगी कल्पना चावला बचपन में ही अत्यंत ऊंचाई पर उड़ने की बात या कर देखें और चांद के शहरों को अपना घर बनाने की बात भी किया करते हैं उनका मन हमेशा हवाओं में उड़ने का किया करता था एक दिन उनके पिता ने कल्पना चावला को एविएशन क्लब ले गए जहां पर भी पुष्पक विमान की एक छोटी सी उड़ान भरकर उन्हें उड़ने का और शेयर करने का अनुभव करा दिया उनकी प्रारंभिक शिक्षा टैगोर बाल निकेतन सीनियर सेकेंडरी से हुई थी| सन 1976 में अच्छे नंबरों से पास करने के बाद उन्होंने चंडीगढ़ में एक इंजीनियर कॉलेज में एडमिशन लिया| जिसका नाम पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज था उसके बाद उन्होंने करो स्पेस इन चेंजिंग से बीटेक की डिग्री प्राप्त की और हाई एजुकेशन के लिए वे अमेरिका चली गई जहां टैक्सास यूनिवर्सिटी से उन्होंने अपने आगे की पढ़ाई को कंप्लीट किया और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में पीएचडी प्राप्ति की और दिसंबर 1994 में नाशा के लिए चुनी गई जहां उन्होंने कई सारे प्रशिक्षण लिए और 16 जनवरी को अंतरिक्ष में भेजा गया space shuttle Columbia STS 107 अपनी 16 दिन की अंतरिक्ष यात्रा पूरी करके फ्लोरिडा में Kennedy Space Center पर उतरने वाला था। आगे बढ़ने से पहले मैं आपको बता दूँ की यह कल्पना की पहली अंतरिक्ष यात्रा नहीं थी। इस से पहले सन 1997 में Columbia STS 87 में अंतरिक्ष यात्रा करने वाले 6 सदस्यों में कल्पना चावला शामिल थी। 19 November से 5 December तक वो अंतरिक्ष में रहीं और उन्होंने 6500000 मील की दूरी अंतरिक्ष में तय की और इस तरह उन्हें प्रथम भारतीय अंतरिक्ष यात्री होने का गौरव प्राप्त हुआ।|

Columbia STS 87 के बाद जब दुबारा space shuttle Columbia STS 107 अंतरिक्ष अभियान के लिए चुना गया तो आमंत्रण पाकर वो ख़ुशी और उत्साह से उछल पड़ी। और फिर से एक बार अंतरिक्ष की यात्रा करने के लिए तैयार हो गयी इस अंतरिक्ष मिशन में 7 सदस्य थे जिनका संक्षिप्त परिचय है। और 1 जनवरी 2003 को स्पेस शिप 16 दिन के बाद धरती में उतरने वाला था तब किसी को नहीं पता था कि आगे क्या होने वाला है 40 सेकंड बाद रेडियो मॉनिटर पर हुआ जो कोई भी देखना नहीं चाहता था| धरती से सिर्फ 63 किलोमीटर परंतु बहुत तेज 20000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से स्पेस शटल नारंगी रंग के गोले और धरती में उतरने से सिर्फ 16 मिनट पहले एक सफेद धुआं दिखाई दिया और पल भर में सब कुछ बिखर गया मिशन कमांडर के टेलीमीटर पर मिलने वाले आखिरी शब्द rojar aah bu…… But i थे कोलंबिया अंतरिक्ष यान की बिखरने के बाद अंतरिक्ष की दीवानी कल्पना चावला सितारों में कहीं खो गए मगर विज्ञान में वह हमेशा याद रहेगी|

कुछ समय बाद कल्पना चावला के ऊपर एक फिल्म तैयार की जाएगी जिसमें दीपिका पादुकोण कल्पना चावला की भूमिका को निभाएंगे|

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